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Ashok Chakradhar’s Quotes
ज़िंदगी को मुस्कुराहट चाहिए, अफ़सोसों का बोझ नहीं।
जो काम हँसी से हो जाए, वहाँ गुस्से की ज़रूरत नहीं होती।
हँसी के दो पल, ज़िंदगी के सौ ग़म भुला देते हैं।
जिसके पास शब्दों का जादू है, उसे तलवार की क्या ज़रूरत!
राजनीति में सच्चाई तलाशने निकले थे, हास्य कवि बनकर लौटे।
सत्ता के गलियारे में सच कहने वाला अक्सर अकेला होता है।
जिन्हें चुटकुले समझा गया, उन्होंने इतिहास लिखा।
जब व्यंग्य चुभता है, तब सच बोल रहा होता है।
मैं हँसता हूँ ताकि रोने की नौबत ना आए।
व्यंग्य वही जो दिल को लगे और दिमाग को जगाए।
राजा की सभा में भी कभी जोकर की ज़रूरत पड़ती है।
कभी शब्द बाण से युद्ध भी लड़ा जाता है।
हँसी मज़ाक में छुपा होता है समाज का आईना।
ताली सुनने को नहीं, समझ सुनाने को लिखता हूँ।
कभी-कभी चुप्पी भी व्यंग्य बन जाती है।
समय से बड़ा शिक्षक कोई नहीं।
हास्य वो दवा है, जो बिना साइड इफेक्ट के काम करती है।
दिलों की दूरी को मिटाने का नाम है कविता।
शब्दों का असर तब होता है जब दिल से निकले हों।
बोलने से पहले सोचो, लेकिन हँसाने के लिए बस दिल चाहिए।
जो बात समझाने से ना समझ आए, उसे व्यंग्य समझा देता है।
हँसी की शक्ति underestimated है।
हास्य वही जो चुभे भी और हँसाए भी।
गंभीरता के समुद्र में हास्य एक नाव है।
बुद्धिमान वही जो हँसकर दुनिया को जीत ले।
जो खुद पर हँस सके, वही बड़ा इंसान है।
कविता लिखना सरल है, असरदार लिखना कला है।
व्यंग्यकार वो कलाकार है जो आग को मुस्कान बना दे।
हँसते रहो, यही ज़िंदगी की जंग जीतने का तरीका है।
चुटकुले नहीं, समाज की पीड़ा कहता हूँ।
हास्य भी एक हथियार है, बस चलाने की कला चाहिए।
शब्दों से जो असर हो, तलवारों से नहीं होता।
कवि की कलम तलवार से ज़्यादा असरदार होती है।
ताली मिली या गाली, लेकिन बात पहुँची ज़रूर।
मैं राजाओं की नहीं, आम आदमी की बात करता हूँ।
कविता वो हथियार है जो बिना लहू के क्रांति लाती है।
जो हँसी में कह दी बात, वो याद रह जाती है।
हास्य कविता लिखना सरल नहीं, ये तो शास्त्र है।
बच्चे भी हँसे, बूढ़े भी समझें – ऐसा व्यंग्य चाहिए।
कहना कुछ और, समझाना सब कुछ – यही कला है।
हँसी की परत में छुपा होता है सच।
जो हँसता है, वही सबसे ज़्यादा दर्द सहता है।
शब्दों से ना खेलो, इन्हीं से जंग जीतनी है।
राजा भी हँसता है, अगर बात सही हो।
जो हँसते हैं, वही इतिहास रचते हैं।
हास्य कवि समाज का सर्जन होता है।
हँसी के पीछे छुपी होती है एक पीड़ा।
व्यंग्य समझने के लिए दिल और दिमाग दोनों चाहिए।
कभी हँसी में भी क्रांति होती है।
सच अगर हँसी में कहा जाए, तो विरोध कम होता है।
जो शब्दों का खेल समझ गया, वो जीवन जीत गया।
कविता सिर्फ प्रेम की नहीं, परिवर्तन की भी होती है।
हँसते रहो, क्योंकि आँसू काम के नहीं।
जो बात संसद में नहीं समझी गई, वो कविता से समझ आ गई।
कलम चलती है तो तलवारें रुक जाती हैं।
सत्ता को आईना दिखाने का नाम है व्यंग्य।
हँसी वो भाषा है जो हर दिल को समझ आती है।
अगर कविता में ताकत है, तो परिवर्तन ज़रूर होगा।
ताली चाहिए तो चुटकुले सुनाओ, बदलाव चाहिए तो कविता लिखो।
जो श्रोता को सोचने पर मजबूर करे, वही सच्चा कवि।
व्यंग्य वो पुल है जो दूरी को मिटाता है।
कभी किताबें भी हथियार बन जाती हैं।
मंच पर जो हँसाता है, वही समाज में सबसे ज़्यादा सोचता है।
हँसी को हल्के में मत लो, इसमें आग छुपी है।
कवि का धर्म है – सच्चाई बोलना।
जो भीड़ को हँसा दे, वो अकेले में कितना रोया है किसी ने नहीं देखा।
कभी कविता भी इलाज बन जाती है।
हास्य का लक्ष्य सिर्फ हँसी नहीं, जागरूकता है।
जहाँ राजनीति थम जाए, वहाँ कविता शुरू होती है।
हँसी से जो दिल तक पहुँच जाए, वो व्यंग्य नहीं, जादू है।
हास्य समाज का सबसे सुंदर आलोचक है।
मैं राजा नहीं, समाज के शब्दों का सेवक हूँ।
कविता नहीं, क्रांति है ये।
हँसी में सच्चाई कहना सबसे मुश्किल कला है।
जो मंच पर हँसाता है, वो समाज को रुलने से बचाता है।
शब्दों का असर कभी-कभी गोली से ज़्यादा होता है।
हँसी के साथ बदलाव की शुरुआत होती है।
मैं कविता में दिल की बात करता हूँ, व्यवस्था की नहीं।
व्यंग्य वही जो सत्ता को भी मुस्कुरा दे।
मैं चुप नहीं, शब्दों से बोलता हूँ।
जब भी सच कहने का समय आए, कविता लिखो।
हँसी में सच, यही तो चमत्कार है।
कविता के नाम पर मज़ाक मत उड़ाओ, इसमें बदलाव छुपा है।
कलम उठाओ, क्रांति आएगी।
हँसने से डरना नहीं चाहिए, बदलाव वहीं से शुरू होता है।
मैं कवि हूँ, मतलब समाज का सच्चा चश्मदीद।
जो कह ना सके, वो लिख दिया।
हास्य वो हथियार है जो बिना खून बहाए जीतता है।
कविता में छुपी होती है अग्नि।
शब्दों को व्यर्थ मत समझो, ये इतिहास बनाते हैं।
राजनीति में कविता की ज़रूरत सबसे ज़्यादा है।
हँसी को हल्के में लेने वाला कभी गंभीर नहीं हो सकता।
मैं हर बार मंच से सिर्फ हँसाता नहीं, जगाता भी हूँ।
हँसी में जो ताना है, वही सबसे सच्चा आईना है।
सत्ता से नहीं डरते, शब्दों से लड़ते हैं।
कलम की धार को समझो, यही असली क्रांति है।
कवि है वो जो हँसते-हँसते रुला दे।
जो कवि डर जाए, वो समाज को क्या जगाएगा।
मैं व्यंग्य नहीं, सच्चाई का कवच पहनकर आया हूँ।
हँसी में जो ज़हर घुला हो, वही सबसे असरदार कविता है।
जब शब्द जंग लड़ें, तब ही बदलाव आएगा।
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Ashok Chakdradhar quotes,
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