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Bhisham Sahni’s Quotes
इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसकी संवेदना होती है।
दुनिया को बदलने की शुरुआत अंदर से होती है।
जब समाज में डर फैलता है, तब साहित्य को बोलना पड़ता है।
जिस साहित्य में पीड़ा नहीं, वह समाज का सच नहीं कह सकता।
हर लेखक अपने समय का इतिहासकार होता है।
असली लेखक वही होता है जो अपने समय की नब्ज़ पहचान ले।
जो कुछ कहना चाहता हूँ, वही मेरा साहित्य है।
जब शब्द चुप हो जाते हैं, तब हिंसा बोलती है।
साहित्य का काम सवाल उठाना है, समाधान देना नहीं।
लेखक का कर्तव्य केवल मनोरंजन नहीं, जागरूकता भी है।
हर रचना अपने युग की गवाही देती है।
जिस समाज में अन्याय हो, वहाँ मौन रहना अपराध है।
विभाजन केवल जमीन का नहीं, दिलों का भी हुआ था।
सच्चा साहित्य वही जो आदमी को आदमी से जोड़ दे।
कलम से निकला हर शब्द जिम्मेदारी लेता है।
साम्प्रदायिकता की आग इंसानियत को जला देती है।
जब भी कोई मज़हब इंसानियत से बड़ा हो जाए, तब विनाश आता है।
इतिहास का सच सबसे अधिक तकलीफदेह होता है।
हमें उन कहानियों को लिखना होगा जो सुनी नहीं गईं।
हर शहर में एक अंधेरा हिस्सा होता है जो इतिहास में दर्ज नहीं होता।
मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान उसकी करुणा है।
लेखक का काम समाज के जख्मों को दिखाना है, छुपाना नहीं।
जिसे लोग कहानी समझते हैं, वह किसी की हकीकत होती है।
साहित्य का धर्म है सच को उजागर करना।
जब सच खौफनाक हो, तब उसे और भी ज़ोर से बोलना चाहिए।
अदब ज़माने का आईना होता है।
मैंने कलम से वह लिखा जिसे लोग बोलने से डरते हैं।
जो लेखन सोचने पर मजबूर करे, वही असली साहित्य है।
कलम को ईमानदार होना चाहिए, चाहे पूरी दुनिया खिलाफ हो।
साहित्य समाज की चेतना है।
हर किरदार अपने समय की कहानी कहता है।
कभी-कभी चुप्पी भी विरोध बन जाती है।
इंसान का बड़प्पन उसकी भाषा में नहीं, व्यवहार में होता है।
दुनिया में जितनी तबाही नफरत ने की है, उतनी शायद किसी और ने नहीं।
जब आप सहन करते हैं, तब अन्याय बढ़ता है।
मज़हब इंसान के लिए है, इंसान मज़हब के लिए नहीं।
हमेशा उन आवाज़ों को सुनो जिन्हें दबा दिया गया है।
लेखक की पहचान उसके सवालों से होती है।
जो समाज अपने अतीत से नहीं सीखता, वह उसे दोहराता है।
कलम को तलवार बनाओ, और अन्याय से लड़ो।
हमारी कहानियां हमारी पहचान होती हैं।
जिस दिन इंसानियत मर जाती है, उस दिन धर्म भी मर जाता है।
साहित्य में शक्ति है परिवर्तन लाने की।
हर कहानी में एक इतिहास छिपा होता है।
हम केवल घटनाओं से नहीं, अनुभवों से बनते हैं।
जिसे तुम ‘छोटा’ समझते हो, वही कभी बड़ा बन जाता है।
मनुष्य को तोड़ना आसान है, जोड़ना मुश्किल।
साहित्य की सबसे बड़ी परीक्षा है कि वह कितनों को सोचने पर मजबूर करता है।
हर ज़माने को एक सच कहने वाला लेखक चाहिए।
लेखक समाज का सजग प्रहरी होता है।
मैंने वह लिखा जो मेरे आसपास हो रहा था।
हर कहानी में एक चुप दर्द होता है।
साहित्य का उत्तरदायित्व है कि वह झूठ को उजागर करे।
जिन्हें हम मामूली समझते हैं, वही असल जीवन के नायक होते हैं।
जहाँ सवाल पूछे जाते हैं, वहीं प्रगति होती है।
इंसान से बड़ा कोई धर्म नहीं।
साहित्य का मतलब ही है—संवेदना का विस्तार।
सच वह नहीं जो सरकार कहे, सच वह है जो आम लोग भुगतते हैं।
जो लिखा नहीं गया, वह भी इतिहास है।
जब दंगे होते हैं, तब सबसे पहले इंसानियत मरती है।
सच बोलना अगर जुर्म है, तो यह जुर्म हर लेखक को करना चाहिए।
मैंने पात्रों के ज़रिए वह सब कहा जो खुलकर नहीं कहा जा सकता था।
जिन्हें सुनने की आदत नहीं होती, उन्हें सच कड़वा लगता है।
कहानी केवल मनोरंजन नहीं, समाज का दस्तावेज़ भी है।
हर पीड़ा को शब्दों में ढालना आसान नहीं होता।
लेखक समाज का सबसे बड़ा साक्षी होता है।
इतिहास को केवल किताबों में मत खोजो, ज़ख्मों में भी पढ़ो।
सामाजिक न्याय केवल नारे से नहीं, संवेदना से आता है।
कभी-कभी किरदार लेखक से भी बड़े हो जाते हैं।
एक लेखक की चुप्पी सबसे बड़ी हार होती है।
हर कहानी एक आवाज़ होती है जो सुनी जाना चाहती है।
जहाँ डर है, वहाँ सच्चाई की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
साहित्य उन आवाज़ों को ज़िंदा रखता है जिन्हें इतिहास मिटा देना चाहता है।
हर लेखक का संघर्ष अपने जमाने से होता है।
जब तक आदमी सोच सकता है, वह बदल सकता है।
सच की ताकत देर से सही, मगर चलती जरूर है।
मैंने लेखन को कभी पेशा नहीं, जिम्मेदारी माना है।
जिन्हें हमने भुला दिया, वही कभी सबसे जरूरी थे।
एक लेखक का काम केवल देखना नहीं, समझना भी होता है।
कलम का धर्म है सत्ता से सवाल करना।
कहानी वही जो अंदर तक उतर जाए।
साहित्य की सबसे बड़ी ताकत है उसकी ईमानदारी।
लेखक वही, जो अपने समय की अनदेखी को उजागर करे।
अगर साहित्य सवाल नहीं करता, तो वह मृत है।
सच कहने का साहस ही लेखक की पूंजी है।
हर व्यक्ति अपने भीतर एक कहानी लेकर चलता है।
जो समाज अपने लेखकों को नहीं सुनता, वह इतिहास से हार जाता है।
कभी एक किताब भी दंगा रोक सकती है।
विचारों का संवाद ही समाज की रीढ़ है।
अगर लेखन से डर लगे, तो समझो तुम सही दिशा में हो।
कहानी कभी खत्म नहीं होती, वह बस अगली पीढ़ी तक जाती है।
विचारों से बड़ा कोई हथियार नहीं।
कलम वो हथियार है जो निर्माण भी कर सकती है और क्रांति भी।
जिन्हें हम ‘सामान्य’ कहते हैं, उन्हीं में असाधारणता छिपी होती है।
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bhisham saini quotes,
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